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प्रदोष व्रत
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प्रदोष व्रत कैलेंडर

प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक उपवास है, जो शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्षों की त्रयोदशी - तेरहवीं तिथि - को रखा जाता है, इसलिए यह हर चंद्र मास में दो बार आता है। पूजा प्रदोष काल में की जाती है, जो सूर्यास्त के आसपास की गोधूलि बेला होती है। यह कैलेंडर आपके शहर के लिए आने वाली प्रदोष व्रत तिथियों को सूचीबद्ध करता है, प्रत्येक के साथ उसका वार और प्रदोष काल की अवधि दी गई है। इसके लिए किसी जन्म विवरण की आवश्यकता नहीं है।

गणना शुक्र, 23 अक्टूबर 2026 के लिए, नई दिल्ली · हर घंटे अद्यतन

कोई परिणाम नहीं मिला।

आगामी तिथियाँ · New Delhi

शुक्र, 23 अक्टूबर 2026
प्रदोष व्रतशुक्ल

शुक्र प्रदोष

प्रदोष17:44 – 20:17
यह तिथि क्यों, और किस ग्रन्थ से

उस दिन लिया गया जिसके प्रदोष काल - रात्रि के पहले तीन मुहूर्त - को त्रयोदशी व्यापती है।

Kane, History of Dharmasastra V.i p.73: "all vratas to be performed in the evening or night have to be performed on the tithi existing in the evening or night even though it may be mixed up (viddha) with another tithi."

वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, अतः सूर्यास्त पर खुलने वाला प्रदोष काल अपनी ही तारीख के वार का होता है। प्रदोष को उस वार के नाम से पुकारना (सोम, भौम, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, रवि) लोक-प्रचलन है, किसी उपलब्ध ग्रन्थ का नियम नहीं।

प्रदोष (रात्रि के पहले तीन मुहूर्त): Dharma Sindhu, Samanya-Paribhasha (digest, unversed): "Nakta vrata is to consume a single meal three muhurtas after Sunset called Pradosha kaala" - three nocturnal muhurtas from sunset, i.e. one fifth of the night arc.

शुक्र, 6 नवंबर 2026
प्रदोष व्रतकृष्ण

शुक्र प्रदोष

प्रदोष17:33 – 20:10
यह तिथि क्यों, और किस ग्रन्थ से

उस दिन लिया गया जिसके प्रदोष काल - रात्रि के पहले तीन मुहूर्त - को त्रयोदशी व्यापती है।

Kane, History of Dharmasastra V.i p.73: "all vratas to be performed in the evening or night have to be performed on the tithi existing in the evening or night even though it may be mixed up (viddha) with another tithi."

वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, अतः सूर्यास्त पर खुलने वाला प्रदोष काल अपनी ही तारीख के वार का होता है। प्रदोष को उस वार के नाम से पुकारना (सोम, भौम, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, रवि) लोक-प्रचलन है, किसी उपलब्ध ग्रन्थ का नियम नहीं।

प्रदोष (रात्रि के पहले तीन मुहूर्त): Dharma Sindhu, Samanya-Paribhasha (digest, unversed): "Nakta vrata is to consume a single meal three muhurtas after Sunset called Pradosha kaala" - three nocturnal muhurtas from sunset, i.e. one fifth of the night arc.

रवि, 22 नवंबर 2026
प्रदोष व्रतशुक्ल

रवि (भानु) प्रदोष

प्रदोष17:25 – 20:06
यह तिथि क्यों, और किस ग्रन्थ से

उस दिन लिया गया जिसके प्रदोष काल - रात्रि के पहले तीन मुहूर्त - को त्रयोदशी व्यापती है।

Kane, History of Dharmasastra V.i p.73: "all vratas to be performed in the evening or night have to be performed on the tithi existing in the evening or night even though it may be mixed up (viddha) with another tithi."

वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, अतः सूर्यास्त पर खुलने वाला प्रदोष काल अपनी ही तारीख के वार का होता है। प्रदोष को उस वार के नाम से पुकारना (सोम, भौम, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, रवि) लोक-प्रचलन है, किसी उपलब्ध ग्रन्थ का नियम नहीं।

प्रदोष (रात्रि के पहले तीन मुहूर्त): Dharma Sindhu, Samanya-Paribhasha (digest, unversed): "Nakta vrata is to consume a single meal three muhurtas after Sunset called Pradosha kaala" - three nocturnal muhurtas from sunset, i.e. one fifth of the night arc.

रवि, 6 दिसंबर 2026
प्रदोष व्रतकृष्ण

रवि (भानु) प्रदोष

प्रदोष17:24 – 20:08
यह तिथि क्यों, और किस ग्रन्थ से

उस दिन लिया गया जिसके प्रदोष काल - रात्रि के पहले तीन मुहूर्त - को त्रयोदशी व्यापती है।

Kane, History of Dharmasastra V.i p.73: "all vratas to be performed in the evening or night have to be performed on the tithi existing in the evening or night even though it may be mixed up (viddha) with another tithi."

वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, अतः सूर्यास्त पर खुलने वाला प्रदोष काल अपनी ही तारीख के वार का होता है। प्रदोष को उस वार के नाम से पुकारना (सोम, भौम, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, रवि) लोक-प्रचलन है, किसी उपलब्ध ग्रन्थ का नियम नहीं।

प्रदोष (रात्रि के पहले तीन मुहूर्त): Dharma Sindhu, Samanya-Paribhasha (digest, unversed): "Nakta vrata is to consume a single meal three muhurtas after Sunset called Pradosha kaala" - three nocturnal muhurtas from sunset, i.e. one fifth of the night arc.

सोम, 21 दिसंबर 2026
प्रदोष व्रतशुक्ल

सोम प्रदोष

प्रदोष17:29 – 20:13
यह तिथि क्यों, और किस ग्रन्थ से

उस दिन लिया गया जिसके प्रदोष काल - रात्रि के पहले तीन मुहूर्त - को त्रयोदशी व्यापती है।

Kane, History of Dharmasastra V.i p.73: "all vratas to be performed in the evening or night have to be performed on the tithi existing in the evening or night even though it may be mixed up (viddha) with another tithi."

वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, अतः सूर्यास्त पर खुलने वाला प्रदोष काल अपनी ही तारीख के वार का होता है। प्रदोष को उस वार के नाम से पुकारना (सोम, भौम, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, रवि) लोक-प्रचलन है, किसी उपलब्ध ग्रन्थ का नियम नहीं।

प्रदोष (रात्रि के पहले तीन मुहूर्त): Dharma Sindhu, Samanya-Paribhasha (digest, unversed): "Nakta vrata is to consume a single meal three muhurtas after Sunset called Pradosha kaala" - three nocturnal muhurtas from sunset, i.e. one fifth of the night arc.

मंगल, 5 जनवरी 2027
प्रदोष व्रतकृष्ण

भौम (मंगल) प्रदोष

प्रदोष17:38 – 20:22
यह तिथि क्यों, और किस ग्रन्थ से

त्रयोदशी दोनों दिन प्रदोष को व्यापती है; जिस दिन वह उसका अधिक भाग व्यापती है, वह लिया गया।

Kane, History of Dharmasastra V.i p.73: "all vratas to be performed in the evening or night have to be performed on the tithi existing in the evening or night even though it may be mixed up (viddha) with another tithi."

निर्णय का आधार आधुनिक रीति है, कोई श्लोक नहीं: जहाँ तिथि लगातार दो दिन विहित काल को व्यापे, वहाँ अधिक व्याप्ति वाला दिन लिया गया है। कोई शास्त्रीय ग्रन्थ व्याप्ति को इस प्रकार नहीं तौलता; यह श्रेणीबद्ध नियम केवल आधुनिक पंचांगकार बताते हैं। यहाँ इसका प्रयोग केवल इसलिए है कि दो समान दावेदार दिनों में से एक निश्चित चुना जा सके।

वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, अतः सूर्यास्त पर खुलने वाला प्रदोष काल अपनी ही तारीख के वार का होता है। प्रदोष को उस वार के नाम से पुकारना (सोम, भौम, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, रवि) लोक-प्रचलन है, किसी उपलब्ध ग्रन्थ का नियम नहीं।

प्रदोष (रात्रि के पहले तीन मुहूर्त): Dharma Sindhu, Samanya-Paribhasha (digest, unversed): "Nakta vrata is to consume a single meal three muhurtas after Sunset called Pradosha kaala" - three nocturnal muhurtas from sunset, i.e. one fifth of the night arc.

बुध, 20 जनवरी 2027
प्रदोष व्रतशुक्ल

बुध प्रदोष

प्रदोष17:50 – 20:31
यह तिथि क्यों, और किस ग्रन्थ से

उस दिन लिया गया जिसके प्रदोष काल - रात्रि के पहले तीन मुहूर्त - को त्रयोदशी व्यापती है।

Kane, History of Dharmasastra V.i p.73: "all vratas to be performed in the evening or night have to be performed on the tithi existing in the evening or night even though it may be mixed up (viddha) with another tithi."

वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, अतः सूर्यास्त पर खुलने वाला प्रदोष काल अपनी ही तारीख के वार का होता है। प्रदोष को उस वार के नाम से पुकारना (सोम, भौम, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, रवि) लोक-प्रचलन है, किसी उपलब्ध ग्रन्थ का नियम नहीं।

प्रदोष (रात्रि के पहले तीन मुहूर्त): Dharma Sindhu, Samanya-Paribhasha (digest, unversed): "Nakta vrata is to consume a single meal three muhurtas after Sunset called Pradosha kaala" - three nocturnal muhurtas from sunset, i.e. one fifth of the night arc.

बुध, 3 फ़रवरी 2027
प्रदोष व्रतकृष्ण

बुध प्रदोष

प्रदोष18:02 – 20:39
यह तिथि क्यों, और किस ग्रन्थ से

उस दिन लिया गया जिसके प्रदोष काल - रात्रि के पहले तीन मुहूर्त - को त्रयोदशी व्यापती है।

Kane, History of Dharmasastra V.i p.73: "all vratas to be performed in the evening or night have to be performed on the tithi existing in the evening or night even though it may be mixed up (viddha) with another tithi."

वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, अतः सूर्यास्त पर खुलने वाला प्रदोष काल अपनी ही तारीख के वार का होता है। प्रदोष को उस वार के नाम से पुकारना (सोम, भौम, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, रवि) लोक-प्रचलन है, किसी उपलब्ध ग्रन्थ का नियम नहीं।

प्रदोष (रात्रि के पहले तीन मुहूर्त): Dharma Sindhu, Samanya-Paribhasha (digest, unversed): "Nakta vrata is to consume a single meal three muhurtas after Sunset called Pradosha kaala" - three nocturnal muhurtas from sunset, i.e. one fifth of the night arc.

गुरु, 18 फ़रवरी 2027
प्रदोष व्रतशुक्ल

गुरु प्रदोष

प्रदोष18:13 – 20:46
यह तिथि क्यों, और किस ग्रन्थ से

उस दिन लिया गया जिसके प्रदोष काल - रात्रि के पहले तीन मुहूर्त - को त्रयोदशी व्यापती है।

Kane, History of Dharmasastra V.i p.73: "all vratas to be performed in the evening or night have to be performed on the tithi existing in the evening or night even though it may be mixed up (viddha) with another tithi."

वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, अतः सूर्यास्त पर खुलने वाला प्रदोष काल अपनी ही तारीख के वार का होता है। प्रदोष को उस वार के नाम से पुकारना (सोम, भौम, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, रवि) लोक-प्रचलन है, किसी उपलब्ध ग्रन्थ का नियम नहीं।

प्रदोष (रात्रि के पहले तीन मुहूर्त): Dharma Sindhu, Samanya-Paribhasha (digest, unversed): "Nakta vrata is to consume a single meal three muhurtas after Sunset called Pradosha kaala" - three nocturnal muhurtas from sunset, i.e. one fifth of the night arc.

शुक्र, 5 मार्च 2027
प्रदोष व्रतकृष्ण

शुक्र प्रदोष

प्रदोष18:24 – 20:51
यह तिथि क्यों, और किस ग्रन्थ से

उस दिन लिया गया जिसके प्रदोष काल - रात्रि के पहले तीन मुहूर्त - को त्रयोदशी व्यापती है।

Kane, History of Dharmasastra V.i p.73: "all vratas to be performed in the evening or night have to be performed on the tithi existing in the evening or night even though it may be mixed up (viddha) with another tithi."

वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, अतः सूर्यास्त पर खुलने वाला प्रदोष काल अपनी ही तारीख के वार का होता है। प्रदोष को उस वार के नाम से पुकारना (सोम, भौम, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, रवि) लोक-प्रचलन है, किसी उपलब्ध ग्रन्थ का नियम नहीं।

प्रदोष (रात्रि के पहले तीन मुहूर्त): Dharma Sindhu, Samanya-Paribhasha (digest, unversed): "Nakta vrata is to consume a single meal three muhurtas after Sunset called Pradosha kaala" - three nocturnal muhurtas from sunset, i.e. one fifth of the night arc.

शनि, 20 मार्च 2027
प्रदोष व्रतशुक्ल

शनि प्रदोष

प्रदोष18:32 – 20:55
यह तिथि क्यों, और किस ग्रन्थ से

उस दिन लिया गया जिसके प्रदोष काल - रात्रि के पहले तीन मुहूर्त - को त्रयोदशी व्यापती है।

Kane, History of Dharmasastra V.i p.73: "all vratas to be performed in the evening or night have to be performed on the tithi existing in the evening or night even though it may be mixed up (viddha) with another tithi."

वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, अतः सूर्यास्त पर खुलने वाला प्रदोष काल अपनी ही तारीख के वार का होता है। प्रदोष को उस वार के नाम से पुकारना (सोम, भौम, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, रवि) लोक-प्रचलन है, किसी उपलब्ध ग्रन्थ का नियम नहीं।

प्रदोष (रात्रि के पहले तीन मुहूर्त): Dharma Sindhu, Samanya-Paribhasha (digest, unversed): "Nakta vrata is to consume a single meal three muhurtas after Sunset called Pradosha kaala" - three nocturnal muhurtas from sunset, i.e. one fifth of the night arc.

प्रदोष व्रत 2026 सूचीप्रदोष व्रत 2027 सूची

प्रदोष व्रत कब पड़ता है और कैसे रखा जाता है

यह व्रत सूर्योदय से नहीं, संध्या से बँधा है, और उसकी तिथि के विषय में यही सबसे महत्वपूर्ण बात है। शेष सब इसी से निकलता है:

नीचे की हर बात उसी संध्या-आधार से निकलती है: इसीलिए यह अवधि दिसंबर में जून की तुलना में स्पष्ट रूप से लंबी होती है, इसीलिए दो शहर वही प्रदोष भिन्न तिथियों पर रख सकते हैं, और इसीलिए सूर्योदय से तिथि दिखाने वाला पंचांग कभी-कभी इस कैलेंडर से असहमत दिखता है।

  • त्रयोदशी - व्रत शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्षों की तेरहवीं तिथि को रखा जाता है, अतः हर चंद्र मास में दो बार आता है।
  • प्रदोष काल - पूजा रात्रि के पहले तीन मुहूर्तों में, सूर्यास्त से आगे, की जाती है। रात्रि सदा पंद्रह मुहूर्त की होती है, अतः यह अवधि सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक के काल का ठीक पाँचवाँ भाग है: शीत में यह लंबी और ग्रीष्म में छोटी होती है, और आपके शहर के सूर्यास्त के साथ खिसकती है।
  • शिव को समर्पित - भक्त दिन भर उपवास रखते हैं और प्रदोष काल में शिव-पार्वती की पूजा करते हैं, जल और बिल्वपत्र अर्पित कर दीप जलाते हैं।
  • बहुत लोग निर्जला या फलाहार व्रत रखते हैं और संध्या की शिव पूजा के बाद पारण करते हैं।

वार के अनुसार प्रदोष व्रत और उनके नाम

जिस वार को त्रयोदशी पड़ती है, उसी से उस प्रदोष का नाम बनता है। चूँकि वार सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है, प्रदोष काल - जो सूर्यास्त पर खुलता है - अपनी ही नागरिक तिथि के वार का होता है। हर वार-भेद को किसी विशेष कामना से जोड़ना लोक-प्रथा है, किसी ऐसे शास्त्रीय ग्रंथ से नहीं जिसकी ओर हम संकेत कर सकें:

इन कामनाओं को कैलेंडर कहीं भी न आँकता है, न गणित करता है। वह केवल वार-भेद का नाम देता है और उससे जुड़ी मान्यता को छूता नहीं, क्योंकि कोई निर्दिष्ट ग्रंथ हर वार के प्रदोष को अलग फल नहीं सौंपता - नीचे की सूची वह है जो व्यवहार बताता है, कोई अध्याय जो विधान करता हो, वह नहीं।

  • सोम प्रदोष (सोमवार) - स्वास्थ्य, मानसिक शांति और मनोकामना पूर्ति हेतु।
  • भौम या मंगल प्रदोष (मंगलवार) - रोग, ऋण और मंगल संबंधी कष्टों से मुक्ति हेतु।
  • बुध प्रदोष (बुधवार) - विद्या, बुद्धि और प्रयासों में सफलता हेतु।
  • गुरु प्रदोष (गुरुवार) - शत्रु निवारण और पितरों के आशीर्वाद हेतु।
  • शुक्र प्रदोष (शुक्रवार) - दांपत्य सामंजस्य, समृद्धि और सौभाग्य हेतु।
  • शनि प्रदोष (शनिवार) - संतान, दीर्घायु और शनि पीड़ा से मुक्ति हेतु।
  • रवि या भानु प्रदोष (रविवार) - उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घ जीवन हेतु।

व्रत किस रात्रि पर रखा जाता है

एक त्रयोदशी लगातार दो रात्रियों के प्रदोष काल को छू सकती है, और उनमें से चुनने का नियम ही वह कारण है जिससे यह कैलेंडर इस रूप में बना है। शासक सिद्धांत केन, हिस्ट्री ऑफ धर्मशास्त्र खंड V भाग I, पृष्ठ 73 है: संध्या या रात्रि में किए जाने वाले सभी व्रत उसी तिथि पर किए जाते हैं जो संध्या या रात्रि में विद्यमान हो, भले वह किसी अन्य तिथि से विद्ध हो। अतः कैलेंडर पहले पूछता है कि त्रयोदशी किस रात्रि के प्रदोष काल में वास्तव में व्याप्त है, और वही रात्रि लेता है।

जब वह ठीक एक में व्याप्त हो, निर्णय हो जाता है और प्रविष्टि यही बता देती है। जब दोनों रात्रियाँ योग्य हों, तब कैलेंडर वह लेता है जिसमें व्याप्ति अधिक है - पहले प्रदोष काल की, फिर पूरी रात्रि की - और उस निर्णय को आधुनिक युक्ति के रूप में अंकित करता है, क्योंकि कोई शास्त्रीय ग्रंथ व्याप्ति को इस प्रकार श्रेणीबद्ध नहीं करता; यह केवल आज के पंचांगकार कहते हैं और इसका प्रयोग मात्र इसलिए है कि दो-प्रत्याशी वाली वास्तविक स्थिति निश्चित रूप से तय हो सके। प्रदोष काल की परिभाषा स्वयं श्लोक नहीं, निबंध-आधारित अंकित की जाती है: धर्मसिंधु की सामान्य परिभाषा नक्त भोजन को सूर्यास्त के तीन मुहूर्त बाद, प्रदोष काल में, बताती है। जिन अक्षांशों और तिथियों पर सूर्य अस्त ही नहीं होता, वहाँ यह अवधि होती ही नहीं, और प्रविष्टि गढ़ा हुआ समय छापने के बजाय यह कह देती है कि गणना क्षीण रूप में की गई है।

How to use the Pradosh Vrat calendar

  1. Enter your city: Set your location so each Pradosh Vrat date and its Pradosh Kaal are computed from your own sunset and night length.
  2. See the upcoming dates: Review the list of upcoming Pradosh Vrat dates, each showing its weekday name and Pradosh Kaal window.
  3. Read how the night was chosen: Each entry names the anchor it used and, where two evenings both qualified, says the greater-overlap heuristic settled it.
  4. Plan your vrat: Note the Pradosh Kaal timing for your chosen date and prepare your fast and Shiva puja for that evening.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित उपवास है जो हर पक्ष की तेरहवीं चंद्र तिथि, त्रयोदशी, को रखा जाता है, अतः हर चंद्र मास में दो बार पड़ता है। भक्त प्रदोष काल में, जो सूर्यास्त से आरंभ होता है, शिव की पूजा करते हैं।

प्रदोष काल रात्रि के पहले तीन मुहूर्त हैं, जो सूर्यास्त से आरंभ होते हैं। रात्रि सदा पंद्रह मुहूर्तों में बँटती है, अतः यह सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक के काल का ठीक पाँचवाँ भाग है - दिल्ली के अक्षांश पर लगभग ढाई घंटे, शीत में अधिक और ग्रीष्म में कम। यह आपके शहर के सूर्यास्त से गणित होता है, इसीलिए कैलेंडर स्थान पूछता है। परिभाषा धर्मसिंधु की सामान्य परिभाषा से आती है, जो नक्त भोजन को सूर्यास्त के तीन मुहूर्त बाद, प्रदोष काल में, बताती है।

प्रदोष का नाम उस वार से बनता है जिस दिन त्रयोदशी पड़ती है - जैसे सोमवार को सोम प्रदोष या शनिवार को शनि प्रदोष। हर वार-भेद परंपरा से किसी विशेष फल के लिए रखा जाता है, जैसे शनि प्रदोष संतान और शनि पीड़ा से मुक्ति हेतु। यह नामकरण लोक-प्रथा है, किसी निर्दिष्ट ग्रंथ का नियम नहीं।

क्योंकि प्रदोष व्रत संध्या का अनुष्ठान है, दिनभर का नहीं। केन, हिस्ट्री ऑफ धर्मशास्त्र खंड V भाग I पृष्ठ 73 कहते हैं कि संध्या या रात्रि में किए जाने वाले व्रत उसी तिथि पर रखे जाते हैं जो संध्या या रात्रि में विद्यमान हो, भले वह किसी अन्य तिथि से विद्ध हो। अतः व्रत उस दिन पड़ता है जिसका प्रदोष काल त्रयोदशी भरती है, जो प्रायः वह दिन नहीं होता जिस दिन सूर्योदय पर त्रयोदशी चल रही हो - और सूर्योदय से तिथि दिखाने वाला पंचांग इसलिए एक दिन अलग लगेगा।

कैलेंडर वही रात्रि लेता है जिसमें त्रयोदशी वास्तव में व्याप्त है। जब दोनों रात्रियाँ योग्य हों तो वह अधिक व्याप्ति वाली लेता है - पहले प्रदोष काल की, फिर पूरी रात्रि की - और उसे श्लोक नहीं, आधुनिक युक्ति के रूप में अंकित करता है, क्योंकि कोई शास्त्रीय ग्रंथ व्याप्ति को मात्रा से श्रेणीबद्ध नहीं करता। यह अंकन प्रविष्टि पर ही रहता है, ताकि आप देख सकें कि तिथि किस आधार पर तय हुई।

नहीं। प्रदोष व्रत कैलेंडर का पालन है, अतः केवल आपका शहर चाहिए। यहाँ स्थान का महत्व सूर्योदय-आधारित कैलेंडर से भी अधिक है, क्योंकि प्रदोष काल आपके स्थानीय सूर्यास्त से नापा जाता है और आपकी रात्रि का पाँचवाँ भाग होता है, इसलिए तिथि और अवधि दोनों आपके अक्षांश तथा ऋतु के साथ बदलते हैं।

संबंधित कैलकुलेटर

एकादशी व्रत कैलेंडरसंकष्टी चतुर्थी कैलेंडरव्रत एवं उपवासदैनिक पंचांग

केवल शैक्षिक उद्देश्य हेतु। ज्योतिषीय व्याख्याएँ पारंपरिक हैं और पेशेवर सलाह का विकल्प नहीं हैं।