यमगण्ड (यमगंडम) राहु काल और गुलिक काल के साथ दिन के तीन अशुभ कालों में से तीसरा है। परंपरा के अनुसार माना जाता है कि यमगण्ड के दौरान आरंभ किए गए कार्य सफलता या पूर्णता तक नहीं पहुँचते, इसलिए किसी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत के लिए इस अवधि से बचा जाता है।
गणना के लिए, नई दिल्ली · हर घंटे अद्यतन
New Delhi · शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026
14:55 – 16:19
सूर्योदय 06:27 · सूर्यास्त 17:44
स्थानीय घड़ी का समय (Asia/Kolkata)। हर पंक्ति उसी दिन के सूर्योदय और सूर्यास्त से निकाली गई है।
| तिथि | यमगण्ड | राहु काल | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|---|---|
| (आज) | 14:55 - 16:19 | 10:41 - 12:05 | 06:27 | 17:44 |
| 13:30 - 14:54 | 09:16 - 10:41 | 06:27 | 17:43 | |
| 12:05 - 13:29 | 16:18 - 17:42 | 06:28 | 17:42 | |
| 10:41 - 12:05 | 07:53 - 09:17 | 06:29 | 17:41 | |
| 09:17 - 10:41 | 14:53 - 16:17 | 06:29 | 17:40 | |
| 07:54 - 09:17 | 12:05 - 13:29 | 06:30 | 17:40 | |
| 06:31 - 07:54 | 13:28 - 14:52 | 06:31 | 17:39 |
गणना कैसे होती है: सूर्योदय और सूर्यास्त शहर के अक्षांश-देशांतर के लिए निकाले जाते हैं और दिन को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। वार के अनुसार भागों की तालिका (राहु, यमगण्ड, गुलिक) सभी प्रकाशित पंचांगों से मेल खाती है, पर इसका कोई शास्त्रीय श्लोक हमें नहीं मिला, इसलिए हम इसे पंचांग-परंपरा के रूप में प्रस्तुत करते हैं। हमारी पद्धति
चुनी हुई तिथि पर अपने नगर का वास्तविक सूर्योदय और सूर्यास्त लीजिए और उनके बीच के अंतराल को आठ बराबर भागों में बाँटिए। उस वार के लिए नियत भाग ही यमगण्ड है: रविवार को पाँचवाँ, सोमवार को चौथा, मंगलवार को तीसरा, बुधवार को दूसरा, गुरुवार को पहला, शुक्रवार को सातवाँ और शनिवार को छठा। गुरुवार ही एकमात्र वार है जिसमें यह दिन का आरंभ करता है।
भाग समानुपाती होने के कारण बारह घंटे के दिन में यह अवधि 90 मिनट की होती है और ऋतु के साथ बदलती है। उदाहरण: गुरुवार को सूर्योदय 06:00 और सूर्यास्त 18:00 हो तो यमगण्ड 06:00 से 07:30 तक, अर्थात् प्रथम भाग। उसी दिन-मान पर शुक्रवार को यह सातवें भाग में, 15:00 से 16:30 तक चला जाता है।
परंपरा इस अवधि को एक विशेष लक्षण देती है जो इसे शेष दो से अलग करता है। कहा जाता है कि यमगण्ड में आरंभ किए गए कार्य पूर्णता तक नहीं पहुँचते, अर्थात् आपत्ति कार्य पर नहीं, आरंभ पर है - इसीलिए पहले से चल रहा कार्य सामान्यतः इसके लिए रोका नहीं जाता।
यह मुहूर्त-परंपरा का कथन है, आपके विषय में इस कैलकुलेटर की कोई भविष्यवाणी नहीं। यमगण्ड तिथि और स्थान का धर्म है, एक ही नगर में उसी दिन सबके लिए समान, और इसका कोई अंश किसी जन्म कुंडली से नहीं पढ़ा जाता।
दिन के उसी आठ-भाग विभाजन से तीनों दिन-दोष निकलते हैं। राहु काल रविवार को आठवाँ भाग लेता है, सोमवार को दूसरा, मंगलवार को सातवाँ, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, शुक्रवार को चौथा और शनिवार को तीसरा। गुलिक काल रविवार के सातवें भाग से घटते हुए शनिवार के पहले भाग तक जाता है। यमगण्ड तीसरा भिन्न भाग लेता है, अतः दिन में सदैव तीन पृथक् वर्जित अवधियाँ रहती हैं।
इस ऐप द्वारा अनुसृत मुहूर्त-ग्रंथों में इन तीनों का कोई प्रमाणित परिहार नहीं मिलता, इसीलिए इन्हें शुभ आरंभ हेतु पूर्ण वर्जित माना जाता है, न कि शमन योग्य। दुर्मुहूर्त, जो आठ भागों से नहीं बल्कि दिन के पंद्रह मुहूर्तों से निकलता है, अधिकांश वारों में एक या दो और अवधियाँ जोड़ देता है।
केवल शैक्षिक उद्देश्य हेतु। ज्योतिषीय व्याख्याएँ पारंपरिक हैं और पेशेवर सलाह का विकल्प नहीं हैं।