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नामकरण मुहूर्त
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नामकरण मुहूर्त

नामकरण वैदिक नामकरण संस्कार है, जो परंपरागत रूप से शिशु के जन्म के ग्यारहवें या बारहवें दिन संपन्न किया जाता है। यह टूल आपके चुने हुए तिथि-अंतराल और नगर के भीतर, पंचांग की तिथि, नक्षत्र और वार के आधार पर इस संस्कार के लिए शुभ तिथियाँ और समय-अवधियाँ खोजता है।

नामकरण संस्कार क्या है?

नामकरण नाम रखने का संस्कार है और वैदिक जीवन के सोलह संस्कारों में से एक है। गृह्यसूत्र इसे जन्म के ग्यारहवें या बारहवें दिन करने का विधान बताते हैं, हालाँकि परिस्थिति की आवश्यकता होने पर परिवार इसे बाद में भी संपन्न करते हैं।

परंपरा के अनुसार शिशु के नाम का पहला अक्षर जन्म नक्षत्र से लिया जाता है — जन्म के समय चंद्रमा का नक्षत्र और पाद — जो एक विशिष्ट ध्वनि (नाम-अक्षर) से जुड़ा होता है। तत्पश्चात औपचारिक संस्कार में शुभ मुहूर्त पर चुने हुए नाम की घोषणा की जाती है।

नामकरण की तिथि को शुभ क्या बनाता है?

शुभ नामकरण दिवस में अनुकूल तिथि, नक्षत्र और वार का मेल होता है, साथ ही शिशु के लिए पर्याप्त चंद्र बल और तारा बल भी होना चाहिए। रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी) तथा अमावस्या को सामान्यतः टाला जाता है, और इसी प्रकार चुनी हुई तिथि पर राहु काल जैसे अशुभ समय-कालों से भी बचा जाता है।

यह कैलकुलेटर आपके तिथि-अंतराल में उन दिनों की जाँच करता है जो इन शर्तों को पूरा करते हैं और उपयुक्त तिथियों को उनकी समय-अवधियों सहित लौटाता है, ताकि आप ऐसी तिथि चुन सकें जो परिवार के लिए भी सुविधाजनक हो।

How to find a Namkaran muhurat

  1. Set the date range: Choose the window to search — for the eleventh or twelfth day, or any later span that suits the family.
  2. Set your city: Pick your city so the tithi, nakshatra and sunrise-based timings are computed for your exact location.
  3. Choose a shubh date: Review the auspicious dates and their muhurat windows returned for your range, and select one for the ceremony.

Frequently asked questions

नामकरण संस्कार कब किया जाना चाहिए?

शास्त्रीय रूप से इसे जन्म के ग्यारहवें या बारहवें दिन किया जाता है। जब यह व्यावहारिक न हो, तो परिवार बाद का कोई शुभ दिन चुनते हैं — यह टूल आपको किसी भी तिथि-अंतराल में खोज करने की सुविधा देता है।

नामकरण में शिशु का नाम कैसे चुना जाता है?

पारंपरिक विधि में शिशु के जन्म नक्षत्र और पाद को लिया जाता है, जिनमें से प्रत्येक एक आरंभिक अक्षर से संबंधित होता है। उसी अक्षर से आरंभ होने वाला नाम शिशु की कुंडली के अनुकूल माना जाता है।

नामकरण के लिए किन दिनों से बचा जाता है?

रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) और अमावस्या को प्रायः छोड़ दिया जाता है, साथ ही वे दिन भी जिनमें अशुभ नक्षत्र या योग हों। अन्यथा शुभ दिन पर भी संस्कार को राहु काल और अन्य अशुभ समय-अवधियों से बाहर रखा जाता है।

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For educational purposes. Astrological interpretations are traditional and not a substitute for professional advice.