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गंडमूल दोष
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गंडमूल दोष कैलकुलेटर

गंडमूल दोष तब माना जाता है जब जन्म के समय चंद्रमा छह संधि नक्षत्रों में से किसी एक में स्थित हो — अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल या रेवती — जो राशियों के बीच की संवेदनशील सीमाओं पर पड़ते हैं। यह टूल आपकी जन्म तिथि, समय और स्थान से आपके चंद्रमा का नक्षत्र निकालता है, बताता है कि वह गंडमूल नक्षत्र है या नहीं, और चंद्रमा का पद तथा नक्षत्र स्वामी दर्शाता है। जहाँ यह दोष मौजूद हो, वहाँ परंपरागत रूप से इसे किसी अभिशाप की तरह नहीं देखा जाता, बल्कि गंडमूल शांति पूजा के द्वारा इसका निवारण किया जाता है।

Birth Details
Check if the Moon is in a Gandmool nakshatra

छह गंडमूल नक्षत्र

गंडमूल दोष पूरी तरह जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र पर निर्भर करता है। सत्ताईस नक्षत्रों में से केवल छह ही इस श्रेणी में आते हैं — केतु और बुध के स्वामित्व वाले वे नक्षत्र जो राशिचक्र की अग्नि-जल संधियों पर स्थित हैं:

  • अश्विनी, मघा और मूल — केतु के स्वामित्व वाले, जो राशि के आरंभ में पड़ते हैं (मेष, सिंह और धनु की शुरुआत में)।
  • आश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती — बुध के स्वामित्व वाले, जो राशि के अंत में पड़ते हैं (कर्क, वृश्चिक और मीन के अंत में)।
  • मिलकर ये राशिचक्र की तीन गंडांत (अग्नि-जल) ग्रंथियों को चिह्नित करते हैं, जिनके लिए शास्त्र जीवन के आरंभिक वर्षों में विशेष सावधानी बरतने का संकेत देते हैं।

पद की तीव्रता और गंडमूल शांति उपाय

हर गंडमूल जन्म को एक ही तरह नहीं पढ़ा जाता। चंद्रमा जिस पद (चरण) में स्थित हो, वह महत्वपूर्ण होता है: राशि की सीमा के सबसे निकट वाले पद — आरंभिक नक्षत्र का पहला पद या अंतिम नक्षत्र का अंतिम पद — सबसे संवेदनशील माने जाते हैं, जबकि शेष पद अपेक्षाकृत हल्के होते हैं। यह कैलकुलेटर आपके चंद्रमा का सटीक पद दर्शाता है ताकि आप देख सकें कि वह कहाँ पड़ता है।

शास्त्रों में इस प्रभाव को भयभीत होने की बजाय शांत किया जाता है। गंडमूल नक्षत्र में जन्म का निवारण परंपरागत रूप से गंडमूल शांति पूजा से किया जाता है, जो 27वें दिन या उसके बाद तब की जाती है जब चंद्रमा पुनः उसी नक्षत्र में लौटता है। ज्योतिषी यह भी बताते हैं कि किसी प्रबल शुभ ग्रह का सहयोग, जैसे गुरु की दृष्टि, इसे कम कर सकता है — और अनेक सफल एवं प्रतिष्ठित व्यक्ति इन्हीं नक्षत्रों में जन्म लेते हैं।

How to check Gandmool Dosha

  1. Enter birth details: Provide your date, time and place of birth so the Moon's exact nakshatra and pada are calculated.
  2. Read the verdict: See whether your Moon falls in one of the six Gandmool nakshatras, with the nakshatra, pada and lord shown.
  3. Note the remedy: If the dosha is present, review the traditional Gandmool Shanti puja performed after the 27th day.

Frequently asked questions

गंडमूल दोष क्या है?

गंडमूल दोष तब माना जाता है जब जन्म के समय चंद्रमा छह संधि नक्षत्रों — अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल या रेवती — में से किसी एक में स्थित हो। ये राशिचक्र की अग्नि-जल सीमाओं पर पड़ते हैं, जिनके लिए शास्त्र जीवन के आरंभिक वर्षों में विशेष सावधानी का संकेत देते हैं।

किन नक्षत्रों से गंडमूल दोष बनता है?

छह: राशि के आरंभ में अश्विनी, मघा और मूल (केतु के स्वामित्व वाले), तथा राशि के अंत में आश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती (बुध के स्वामित्व वाले)। यदि आपका चंद्रमा इनके अतिरिक्त किसी अन्य नक्षत्र में हो, तो यह दोष नहीं होता।

गंडमूल दोष का उपाय क्या है?

परंपरागत उपाय गंडमूल शांति पूजा है, जो प्रायः जन्म के 27वें दिन तब की जाती है जब चंद्रमा पुनः उसी नक्षत्र में लौटता है। इसे किसी अभिशाप के निवारण की बजाय एक शांतिदायक अनुष्ठान माना जाता है, और शुभ ग्रहों का सहयोग होने पर इसका प्रभाव हल्का समझा जाता है।

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For educational purposes. Astrological interpretations are traditional and not a substitute for professional advice.