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योगिनी दशा
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योगिनी दशा कैलकुलेटर

योगिनी दशा आठ योगिनियों (मंगला, पिंगला, धान्या, भ्रामरी, भद्रिका, उल्का, सिद्धा और संकटा) पर आधारित 36 वर्षों की एक चक्रीय दशा प्रणाली है। विंशोत्तरी दशा के साथ-साथ घटनाओं के त्वरित एवं सटीक समय-निर्धारण के लिए यह एक प्रिय पद्धति मानी जाती है।

Birth Details
Calculate your Yogini Dasha periods

आठ योगिनियाँ और उनकी अवधि

वैदिक दशा-गणित में इससे सरल कुछ नहीं: क्रम से 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7 और 8 वर्ष, जिनका योग 36 होता है। मंगला एक वर्ष लेती है और चंद्र से जुड़ी है, पिंगला दो और सूर्य से, धान्या तीन और गुरु से, भ्रामरी चार और मंगल से, भद्रिका पाँच और बुध से, उल्का छह और शनि से, सिद्धा सात और शुक्र से, संकटा आठ और राहु से।

इस चक्र में आपका जीवन कहाँ से आरंभ होता है, यह जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र से तय होता है। नक्षत्र-क्रमांक आरंभिक योगिनी चुनता है, और चंद्रमा उस नक्षत्र में कितना चल चुका था, इससे यह निकलता है कि जन्म के समय पहली अवधि कितनी बीत चुकी थी - वही दशा-शेष की गणना जो विंशोत्तरी में होती है।

दूसरी दशा-प्रणाली की आवश्यकता क्यों

विंशोत्तरी 120 वर्ष की है, अतः अधिकांश लोग जीवन भर में छह या सात महादशाएँ ही देखते हैं और हर एक लंबा खंड घेरती है। योगिनी का 36 वर्ष का चक्र उसी अवधि में तीन बार घूम जाता है, और उसकी सबसे छोटी अवधि एक ही वर्ष की है - इसीलिए इसे विंशोत्तरी का स्थान लेने वाली नहीं, निकट भविष्य के समय-निर्धारण की दूसरी राय माना जाता है।

दोनों को आमने-सामने नहीं, साथ-साथ पढ़ा जाता है। जिस अवधि को दोनों प्रणालियाँ महत्वपूर्ण बताएँ, वही ज्योतिषी खोजते हैं; और जहाँ दोनों भिन्न पड़ें, वहाँ किसी को दूसरे पर वरीयता नहीं दी जाती। यह ऐप दोनों को एक ही चंद्र-स्थिति से गणता है, ताकि तुलना समान आधार पर हो।

यह कैलकुलेटर क्या देता है

यह जन्म से आगे की पूरी महादशा-शृंखला निकालता है, प्रत्येक के भीतर अंतर्दशाएँ रखता है, और हर अवधि की ठीक आरंभ तथा समाप्ति तिथि छापता है। चूँकि पूरी शृंखला जन्म के समय चंद्रमा के देशांतर से बँधी है, शुद्ध जन्म समय महत्व रखता है: चंद्रमा प्रतिदिन लगभग तेरह अंश चलता है, अतः एक घंटे की भूल शृंखला की हर संधि खिसका देती है।

यह पृष्ठ अवधियाँ और तिथियाँ बताता है, किसी योगिनी के नाम के साथ फल नहीं जोड़ता। AstroZivi फल तभी प्रकाशित करता है जब पीछे नामित ग्रंथ और श्लोक हो; दशा की रचना और उसकी तिथियाँ वही हैं जो गणित से ठीक-ठीक निकलती हैं, और यह उपकरण उसी के लिए है।

How to calculate your Yogini Dasha

  1. Enter your birth details: Date, time and place, so the Moon's sidereal longitude at birth is exact; the whole sequence hangs off it.
  2. Read the opening Yogini and its balance: The first period is usually partial, because it began before you were born; the tool shows how much of it remained.
  3. Follow the sequence: The eight Yoginis run 1 to 8 years in order and then repeat, and each mahadasha is shown with its antardashas.
  4. Compare with Vimshottari: Run the current-dasha tool on the same birth details to see where the two systems agree.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

योगिनी दशा क्या है?

आठ योगिनियों से बना 36 वर्ष का चक्रीय दशा-क्रम, जिनकी अवधि 1 से 8 वर्ष तक है - मंगला, पिंगला, धान्या, भ्रामरी, भद्रिका, उल्का, सिद्धा और संकटा - प्रत्येक किसी एक ग्रह से जुड़ी, और चंद्रमा के जन्म नक्षत्र से लागू। इसका छोटा चक्र इसे विंशोत्तरी के साथ निकट भविष्य के समय-निर्धारण में उपयोगी बनाता है।

प्रत्येक योगिनी की अवधि कितनी होती है?

क्रम से: मंगला 1 वर्ष, पिंगला 2, धान्या 3, भ्रामरी 4, भद्रिका 5, उल्का 6, सिद्धा 7 और संकटा 8। आठों का योग 36 वर्ष होता है, जिसके बाद चक्र दोहरा जाता है।

कौन-सी योगिनी किस ग्रह से जुड़ी है?

मंगला चंद्र से, पिंगला सूर्य से, धान्या गुरु से, भ्रामरी मंगल से, भद्रिका बुध से, उल्का शनि से, सिद्धा शुक्र से और संकटा राहु से। इस प्रणाली में केतु को कोई अवधि नहीं मिलती।

पहली योगिनी कैसे तय होती है?

जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में था उससे: नक्षत्र-क्रमांक आरंभिक योगिनी चुनता है, और उस नक्षत्र का जितना अंश चंद्रमा पार कर चुका था, उतनी ही पहली अवधि जन्म से पहले बीत चुकी होती है।

क्या योगिनी दशा विंशोत्तरी से बेहतर है?

कोई भी दूसरे का स्थान नहीं लेती। विंशोत्तरी का 120 वर्ष का चक्र लंबी महादशाएँ देता है; योगिनी का 36 वर्ष का चक्र जीवन भर में तीन बार घूम जाता है और इसकी अवधियाँ एक वर्ष तक छोटी होती हैं, इसलिए इसे विकल्प नहीं, दूसरी समय-परत के रूप में पढ़ा जाता है।

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For educational purposes. Astrological interpretations are traditional and not a substitute for professional advice.