षड्बल किसी ग्रह के बल का शास्त्रीय छह-गुना माप है — स्थान, दिग्, काल, चेष्टा, नैसर्गिक और दृक् बल — जिन्हें जोड़कर 'रूप' नामक इकाइयों में व्यक्त किया जाता है। यह उपकरण आपकी कुंडली के सातों ग्रहों में से प्रत्येक के लिए इन छहों घटकों की गणना करता है और प्रत्येक ग्रह के कुल बल की तुलना उस ग्रह के लिए आवश्यक न्यूनतम बल से करता है।
प्रत्येक ग्रह छह स्वतंत्र स्रोतों से बल प्राप्त करता है। इनके उप-बलों की गणना विरूपों में की जाती है और इन्हें जोड़कर उस ग्रह का कुल षड्बल प्राप्त होता है।
छहों बलों को जोड़कर कुल बल रूपों में मापा जाता है, जहाँ 1 रूप 60 विरूप के बराबर होता है। किसी ग्रह को तब बलवान माना जाता है जब उसका कुल बल बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में निर्धारित न्यूनतम को पूरा करे या उससे अधिक हो।
प्रत्येक ग्रह का अपना न्यूनतम रूपों में होता है — बुध 7.0, सूर्य और गुरु 6.5, चंद्र 6.0, शुक्र 5.5, तथा मंगल और शनि 5.0। इस सीमा के बराबर या उससे अधिक कुल बल को बलवान माना जाता है।
रूप वह इकाई है जिसमें षड्बल मापा जाता है, जो 60 विरूप के बराबर होती है। छहों घटक-बलों की गणना विरूपों में की जाती है, फिर उन्हें जोड़कर रूपों में व्यक्त किया जाता है।
चेष्टा (गति-जनित) बल पाँच तारा-ग्रहों — मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि — पर लागू होता है, जो उनकी गति और वक्रता से मिलता है। सूर्य और चंद्र को इसके स्थान पर अयन और पक्ष बल दिया जाता है।
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For educational purposes. Astrological interpretations are traditional and not a substitute for professional advice.