Mrigashira · 27 में से नक्षत्र #5 · मंगल द्वारा शासित
इस स्तंभ के दो साक्षी हैं — एक, जिस रूप में परंपरागत ज्योतिष ग्रंथ देवता को देते हैं; दूसरा, तैत्तिरीय ब्राह्मण की नक्षत्रेष्टि (III.1.4-5), जो प्रत्येक नक्षत्र के देवता का नाम लेकर हवि निर्दिष्ट करती है। दोनों अलग-अलग दिखाए गए हैं, एक में मिलाए नहीं गए।
यहाँ दोनों साक्षी एक ही देवता का नाम लेते हैं। सत्ताईस में से चार नक्षत्रों में वे भिन्न हैं — रोहिणी, पूर्व फाल्गुनी, उत्तर फाल्गुनी और मूल — यह उनमें से नहीं है।
जिज्ञासु खोजी, बौद्धिक अन्वेषक। दोहरी प्रकृति।
शोध, लेखन, यात्रा, शिक्षण, रत्न विज्ञान, सॉफ्टवेयर।
गर्दन और कंधे की समस्याएं। एलर्जी।
बौद्धिक रूप से उत्तेजक साथी। कई रुचियां।
आधुनिक नक्षत्र संश्लेषण - किसी शास्त्रीय ग्रंथ से नहीं।
मृगशिरा नक्षत्र के चार पद हैं जिनके प्रारंभिक अक्षर वे, वो, का, की हैं — वैदिक नामकरण पद्धति में इस नक्षत्र में जन्मे शिशु के नाम का शुभ प्रथम अक्षर चुनने के लिए इनका उपयोग होता है।
पद 1 सिंह नवांश में - अग्नि तत्व, धर्म (उद्देश्य)। यह आत्मविश्वास, नेतृत्व और मान्यता की चाह जोड़ता है, मृगशिरा की अभिव्यक्ति को धर्म (उद्देश्य) की ओर झुकाता है।
पद 2 कन्या नवांश में - पृथ्वी तत्व, अर्थ (समृद्धि)। यह विश्लेषण, अनुशासन और सूक्ष्मता जोड़ता है, मृगशिरा की अभिव्यक्ति को अर्थ (समृद्धि) की ओर झुकाता है।
पद 3 तुला नवांश में - वायु तत्व, काम (इच्छा)। यह कूटनीति, संतुलन और सौंदर्यबोध जोड़ता है, मृगशिरा की अभिव्यक्ति को काम (इच्छा) की ओर झुकाता है।
पद 4 वृश्चिक नवांश में - जल तत्व, मोक्ष (मुक्ति)। यह तीव्रता, गहराई और परिवर्तनकारी शक्ति जोड़ता है, मृगशिरा की अभिव्यक्ति को मोक्ष (मुक्ति) की ओर झुकाता है।
For educational purposes. Nakshatra interpretations are traditional and based on the Moon's birth star.