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तुला - वार्षिक स्वास्थ्य

प्रथम भाव बल और दुर्बलता का (बृ.पा.हो.शा. 11.2), षष्ठ व्रण और शत्रु का (11.7), अष्टम आयु का (11.9)। · वर्ष (सौर-प्रवेश)

यह चन्द्र राशि से पढ़ा जाता है, सूर्य राशि से नहीं

यह फल आपकी चन्द्र राशि से निकाला गया है - वह राशि जिसमें जन्म के समय चन्द्र थे - सूर्य राशि से नहीं। फलदीपिका 26.1 कहती है कि सब लग्नों में गोचर-फल के लिए केवल चन्द्र-लग्न ही प्रमाण है, और बृहत् संहिता के 104वें अध्याय का प्रत्येक फल 'जन्म के समय चन्द्र जिस राशि में हों, उससे' शब्दों में कहा गया है।

अपनी चन्द्र राशि और नक्षत्र जानें →या पूरी कुंडली बनाएँ
वर्ष (सौर-प्रवेश)14 अप्रैल 2026 → 14 अप्रैल 2027

जन्म-विवरण नहीं दिया गया, अतः ताजिक सौर-प्रवेश की गणना सम्भव नहीं हुई। यहाँ दिखाई गई अवधि सौर वर्ष है - मेष संक्रान्ति से मेष संक्रान्ति तक, जिसे सूर्य सिद्धान्त XIV.10 बारह सौर मासों से बनाता है। वर्षफल स्तर को इससे अनुमान लगाने के बजाय अनुपलब्ध बताया गया है: सौर वर्ष और सौर-प्रवेश वर्ष भिन्न वस्तुएँ हैं, भिन्न सीमाओं के साथ।

स्वास्थ्य - भाव और कारक

प्रथम भाव बल और दुर्बलता का (बृ.पा.हो.शा. 11.2), षष्ठ व्रण और शत्रु का (11.7), अष्टम आयु का (11.9)। सूर्य आरोग्य और बल, मंगल रोग तथा शनि आयु के कारक हैं (फलदीपिका 15.15-16, 15.17)। यह कुण्डली का पाठ है, कोई चिकित्सकीय निदान नहीं।

भाव - बृहत्पाराशरहोराशास्त्र अध्याय 11

प्रथम भावBPHS 11.2

शरीर और उसकी गठन, रूप, बुद्धि, वर्ण, बल एवं दुर्बलता, सुख और शोक, तथा जन्मजात स्वभाव

षष्ठ भावBPHS 11.7

मामा, मृत्यु-सम्बन्धी संशय, शत्रु, व्रण, तथा विमाता

अष्टम भावBPHS 11.9

आयु, युद्ध, शत्रु, दुर्ग, मृतकों का धन, तथा भूत और भविष्य

कारक - फलदीपिका 15.17 तथा 15.15-16

सूर्यभाव प्रथम का कारक - फलदीपिका 15.17

स्वयं, पिता, प्रभाव, आरोग्य, बल और भाग्य

मंगलभाव षष्ठ का कारक - फलदीपिका 15.17

साहस, रोग, गुण, छोटे भाई-बहन, भूमि, शत्रु और पैतृक पक्ष

शनिभाव षष्ठ, अष्टम का कारक - फलदीपिका 15.17

आयु, आजीविका, मृत्यु का कारण, विपत्ति और सेवक

त्रि-पक्षीय निर्णय - फलदीपिका 15.25जन्म-कुण्डली के बिना गणना सम्भव नहीं

फलदीपिका 15.25 भाव, उसके स्वामी और उसके कारक - तीनों का बल एक साथ माँगती है, और 15.2 का उत्तर तीन-मूल्य वाला है: पुष्ट, क्षीण अथवा मिश्र। कोई अंक नहीं, कोई प्रतिशत नहीं।

यहाँ केवल राशि दी गई है, इसलिए भाव-बल और भाव-स्वामी के पक्ष नहीं बनते और निर्णय “अपर्याप्त निवेश” है - अनुमान से भरा नहीं गया।

यह चिकित्सकीय सलाह नहीं है

AstroZivi किसी भी प्रकार का चिकित्सकीय दावा नहीं करता। ऊपर की पढ़त भाव, कारक और गोचर-स्थिति बताती है; किसी रोग का नाम नहीं लेती, कोई निदान या पूर्वानुमान नहीं देती, और किसी उपचार का सुझाव नहीं देती। स्वास्थ्य सम्बन्धी किसी भी चिन्ता के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श करें।

यह अवधि, समग्र रूप से

विषय की पढ़त इसी खिड़की के भीतर ली गई है, इसलिए पूरी खिड़की भी यहीं दी गई है।

द्वादश-भाव फल - पाठ-भेद सहित

सूर्यचन्द्रमा से 12वाँपाठ-भेद है
“the person will gain his object only by the adoption of just and proper means and not otherwise”
Brihat Samhita, 104.7 (Iyer Part II ch. LVII) (tr. N. Chidambaram Iyer, 1885) · tr. N. Chidambaram Iyer, 1885

Phaladeepika 26.9-11

शोक, धन-हानि, मित्रों से कलह और ज्वर

Prasna Marga XXII.2-4

जातक किसी भी सत्कर्म का फल नहीं पा सकेगा

जहाँ पाठ भिन्न कहते हैं, वहीं भिन्नता ही सूचना है - उन्हें मिलाकर तीसरा वाक्य नहीं बनाया गया, जो किसी ग्रंथ में नहीं है।

ताजिक वर्षफल यहाँ नहीं बन सकता

वर्ष-प्रवेश वह क्षण है जब सूर्य जन्म के ठीक उसी निरयण अंश पर लौटते हैं, और वह चक्र जन्म-स्थान के लिए बनता है - इसके लिए जन्म-समय और स्थान चाहिए, केवल राशि से यह सम्भव नहीं। मुन्था, वर्षेश, सहम और मुद्दा दशा - सब इसी पर टिके हैं।

जन्म-विवरण के साथ वर्षफल बनाएँ →

इस अवधि में क्या बदलता है

  • 21 अप्रैल 2026 · चंद्र → वृषभ (चन्द्रमा से 5 → 8; अशुभ → अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत)
  • 21 अप्रैल 2026 · शुक्र → वृषभ (चन्द्रमा से 7 → 8; अशुभ → शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध)
  • 28 अप्रैल 2026 · चंद्र → कन्या (चन्द्रमा से 8 → 12; अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत → अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत)
  • 5 मई 2026 · चंद्र → वृश्चिक (चन्द्रमा से 12 → 2; अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत → अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत)
  • 5 मई 2026 · बुध → मेष (चन्द्रमा से 6 → 7; शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध → अशुभ)
  • 12 मई 2026 · चंद्र → कुम्भ (चन्द्रमा से 2 → 5; अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत → अशुभ)
  • 12 मई 2026 · मंगल → मेष (चन्द्रमा से 6 → 7; शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध → अशुभ)
  • 19 मई 2026 · सूर्य → वृषभ (चन्द्रमा से 7 → 8; अशुभ → अशुभ)
  • 19 मई 2026 · चंद्र → मिथुन (चन्द्रमा से 5 → 9; अशुभ → अशुभ)
  • 19 मई 2026 · बुध → वृषभ (चन्द्रमा से 7 → 8; अशुभ → शुभ)
  • 19 मई 2026 · शुक्र → मिथुन (चन्द्रमा से 8 → 9; शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध → शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध)
  • 26 मई 2026 · चंद्र → कन्या (चन्द्रमा से 9 → 12; अशुभ → अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत)
  • 2 जून 2026 · चंद्र → धनु (चन्द्रमा से 12 → 3; अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत → शुभ)
  • 2 जून 2026 · बुध → मिथुन (चन्द्रमा से 8 → 9; शुभ → अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत)
  • 2 जून 2026 · गुरु → कर्क (चन्द्रमा से 9 → 10; शुभ → अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत)
  • 9 जून 2026 · चंद्र → मीन (चन्द्रमा से 3 → 6; शुभ → शुभ)
  • 9 जून 2026 · शुक्र → कर्क (चन्द्रमा से 9 → 10; शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध → अशुभ)
  • 16 जून 2026 · सूर्य → मिथुन (चन्द्रमा से 8 → 9; अशुभ → अशुभ)
  • 16 जून 2026 · चंद्र → मिथुन (चन्द्रमा से 6 → 9; शुभ → अशुभ)
  • 23 जून 2026 · चंद्र → कन्या (चन्द्रमा से 9 → 12; अशुभ → अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत)
  • 23 जून 2026 · बुध → कर्क (चन्द्रमा से 9 → 10; अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत → शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध)
  • 23 जून 2026 · मंगल → वृषभ (चन्द्रमा से 7 → 8; अशुभ → अशुभ)
  • 30 जून 2026 · चंद्र → धनु (चन्द्रमा से 12 → 3; अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत → शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध)
  • 7 जुलाई 2026 · चंद्र → मीन (चन्द्रमा से 3 → 6; शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध → शुभ)
  • 7 जुलाई 2026 · शुक्र → सिंह (चन्द्रमा से 10 → 11; अशुभ → शुभ)
  • 14 जुलाई 2026 · चंद्र → मिथुन (चन्द्रमा से 6 → 9; शुभ → अशुभ)
  • 14 जुलाई 2026 · बुध → मिथुन (चन्द्रमा से 10 → 9; शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध → अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत)
  • 21 जुलाई 2026 · सूर्य → कर्क (चन्द्रमा से 9 → 10; अशुभ → शुभ)
  • 21 जुलाई 2026 · चंद्र → तुला (चन्द्रमा से 9 → 1; अशुभ → शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध)
  • 28 जुलाई 2026 · चंद्र → धनु (चन्द्रमा से 1 → 3; शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध → शुभ)
  • 4 अगस्त 2026 · चंद्र → मीन (चन्द्रमा से 3 → 6; शुभ → शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध)
  • 4 अगस्त 2026 · शुक्र → कन्या (चन्द्रमा से 11 → 12; शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध → शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध)
  • 4 अगस्त 2026 · मंगल → मिथुन (चन्द्रमा से 8 → 9; अशुभ → अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत)
  • 11 अगस्त 2026 · चंद्र → कर्क (चन्द्रमा से 6 → 10; शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध → शुभ)
  • 11 अगस्त 2026 · बुध → कर्क (चन्द्रमा से 9 → 10; अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत → शुभ)
  • 18 अगस्त 2026 · सूर्य → सिंह (चन्द्रमा से 10 → 11; शुभ → शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध)
  • 18 अगस्त 2026 · चंद्र → तुला (चन्द्रमा से 10 → 1; शुभ → शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध)
  • 25 अगस्त 2026 · चंद्र → मकर (चन्द्रमा से 1 → 4; शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध → अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत)
  • 25 अगस्त 2026 · बुध → सिंह (चन्द्रमा से 10 → 11; शुभ → शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध)
  • 1 सितंबर 2026 · चंद्र → मेष (चन्द्रमा से 4 → 7; अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत → शुभ)
  • 8 सितंबर 2026 · चंद्र → कर्क (चन्द्रमा से 7 → 10; शुभ → शुभ)
  • 8 सितंबर 2026 · बुध → कन्या (चन्द्रमा से 11 → 12; शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध → अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत)
  • 8 सितंबर 2026 · शुक्र → तुला (चन्द्रमा से 12 → 1; शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध → शुभ)
  • 15 सितंबर 2026 · चंद्र → तुला (चन्द्रमा से 10 → 1; शुभ → शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध)
  • 22 सितंबर 2026 · सूर्य → कन्या (चन्द्रमा से 11 → 12; शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध → अशुभ)
  • 22 सितंबर 2026 · चंद्र → मकर (चन्द्रमा से 1 → 4; शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध → अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत)
  • 22 सितंबर 2026 · मंगल → कर्क (चन्द्रमा से 9 → 10; अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत → अशुभ)
  • 29 सितंबर 2026 · चंद्र → मेष (चन्द्रमा से 4 → 7; अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत → शुभ)
  • 29 सितंबर 2026 · बुध → तुला (चन्द्रमा से 12 → 1; अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत → अशुभ)
  • 6 अक्टूबर 2026 · चंद्र → कर्क (चन्द्रमा से 7 → 10; शुभ → शुभ)
  • 13 अक्टूबर 2026 · चंद्र → तुला (चन्द्रमा से 10 → 1; शुभ → शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध)
  • 20 अक्टूबर 2026 · सूर्य → तुला (चन्द्रमा से 12 → 1; अशुभ → अशुभ)
  • 20 अक्टूबर 2026 · चंद्र → मकर (चन्द्रमा से 1 → 4; शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध → अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत)
  • 27 अक्टूबर 2026 · चंद्र → मेष (चन्द्रमा से 4 → 7; अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत → शुभ)
  • 3 नवंबर 2026 · चंद्र → सिंह (चन्द्रमा से 7 → 11; शुभ → शुभ)
  • 3 नवंबर 2026 · गुरु → सिंह (चन्द्रमा से 10 → 11; अशुभ → शुभ)
  • 10 नवंबर 2026 · चंद्र → वृश्चिक (चन्द्रमा से 11 → 2; शुभ → अशुभ)
  • 10 नवंबर 2026 · शुक्र → कन्या (चन्द्रमा से 1 → 12; शुभ → शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध)
  • 17 नवंबर 2026 · सूर्य → वृश्चिक (चन्द्रमा से 1 → 2; अशुभ → अशुभ)
  • 17 नवंबर 2026 · चंद्र → मकर (चन्द्रमा से 2 → 4; अशुभ → अशुभ)
  • 17 नवंबर 2026 · मंगल → सिंह (चन्द्रमा से 10 → 11; अशुभ → शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध)
  • 24 नवंबर 2026 · चंद्र → वृषभ (चन्द्रमा से 4 → 8; अशुभ → अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत)
  • 24 नवंबर 2026 · शुक्र → तुला (चन्द्रमा से 12 → 1; शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध → शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध)
  • 1 दिसंबर 2026 · चंद्र → सिंह (चन्द्रमा से 8 → 11; अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत → शुभ)
  • 8 दिसंबर 2026 · चंद्र → वृश्चिक (चन्द्रमा से 11 → 2; शुभ → अशुभ)
  • 8 दिसंबर 2026 · बुध → वृश्चिक (चन्द्रमा से 1 → 2; अशुभ → शुभ)
  • 8 दिसंबर 2026 · राहु → मकर (चन्द्रमा से 5 → 4; अशुभ → अशुभ)
  • 8 दिसंबर 2026 · केतु → कर्क (चन्द्रमा से 11 → 10; शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध → अशुभ)
  • 15 दिसंबर 2026 · चंद्र → कुम्भ (चन्द्रमा से 2 → 5; अशुभ → अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत)
  • 22 दिसंबर 2026 · सूर्य → धनु (चन्द्रमा से 2 → 3; अशुभ → शुभ)
  • 22 दिसंबर 2026 · चंद्र → वृषभ (चन्द्रमा से 5 → 8; अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत → अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत)
  • 22 दिसंबर 2026 · बुध → धनु (चन्द्रमा से 2 → 3; शुभ → अशुभ)
  • 29 दिसंबर 2026 · चंद्र → सिंह (चन्द्रमा से 8 → 11; अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत → शुभ)
  • 5 जनवरी 2027 · चंद्र → वृश्चिक (चन्द्रमा से 11 → 2; शुभ → अशुभ)
  • 5 जनवरी 2027 · शुक्र → वृश्चिक (चन्द्रमा से 1 → 2; शुभ → शुभ)
  • 12 जनवरी 2027 · चंद्र → कुम्भ (चन्द्रमा से 2 → 5; अशुभ → अशुभ)
  • 12 जनवरी 2027 · बुध → मकर (चन्द्रमा से 3 → 4; अशुभ → शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध)
  • 19 जनवरी 2027 · सूर्य → मकर (चन्द्रमा से 3 → 4; शुभ → अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत)
  • 19 जनवरी 2027 · चंद्र → वृषभ (चन्द्रमा से 5 → 8; अशुभ → अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत)
  • 26 जनवरी 2027 · चंद्र → कन्या (चन्द्रमा से 8 → 12; अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत → अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत)
  • 26 जनवरी 2027 · गुरु → कर्क (चन्द्रमा से 11 → 10; शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध → अशुभ)
  • 2 फ़रवरी 2027 · चंद्र → धनु (चन्द्रमा से 12 → 3; अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत → शुभ)
  • 2 फ़रवरी 2027 · बुध → कुम्भ (चन्द्रमा से 4 → 5; शुभ → अशुभ)
  • 2 फ़रवरी 2027 · शुक्र → धनु (चन्द्रमा से 2 → 3; शुभ → शुभ)
  • 9 फ़रवरी 2027 · चंद्र → कुम्भ (चन्द्रमा से 3 → 5; शुभ → अशुभ)
  • 16 फ़रवरी 2027 · सूर्य → कुम्भ (चन्द्रमा से 4 → 5; अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत → अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत)
  • 16 फ़रवरी 2027 · चंद्र → वृषभ (चन्द्रमा से 5 → 8; अशुभ → अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत)
  • 23 फ़रवरी 2027 · चंद्र → कन्या (चन्द्रमा से 8 → 12; अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत → अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत)
  • 2 मार्च 2027 · चंद्र → धनु (चन्द्रमा से 12 → 3; अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत → शुभ)
  • 2 मार्च 2027 · बुध → मकर (चन्द्रमा से 5 → 4; अशुभ → शुभ)
  • 2 मार्च 2027 · शुक्र → मकर (चन्द्रमा से 3 → 4; शुभ → शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध)
  • 9 मार्च 2027 · चंद्र → मीन (चन्द्रमा से 3 → 6; शुभ → शुभ)
  • 16 मार्च 2027 · सूर्य → मीन (चन्द्रमा से 5 → 6; अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत → शुभ)
  • 16 मार्च 2027 · चंद्र → मिथुन (चन्द्रमा से 6 → 9; शुभ → अशुभ)
  • 16 मार्च 2027 · बुध → कुम्भ (चन्द्रमा से 4 → 5; शुभ → अशुभ)
  • 16 मार्च 2027 · मंगल → कर्क (चन्द्रमा से 11 → 10; शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध → अशुभ)
  • 23 मार्च 2027 · चंद्र → कन्या (चन्द्रमा से 9 → 12; अशुभ → अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत)
  • 23 मार्च 2027 · शुक्र → कुम्भ (चन्द्रमा से 4 → 5; शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध → शुभ)
  • 30 मार्च 2027 · चंद्र → धनु (चन्द्रमा से 12 → 3; अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत → शुभ)
  • 6 अप्रैल 2027 · चंद्र → मीन (चन्द्रमा से 3 → 6; शुभ → शुभ)
  • 6 अप्रैल 2027 · बुध → मीन (चन्द्रमा से 5 → 6; अशुभ → शुभ)

चन्द्राष्टम: 21 अप्रैल 2026, 24 नवंबर 2026, 22 दिसंबर 2026, 19 जनवरी 2027, 16 फ़रवरी 2027

इस अवधि में लत्ता और अशुभ तारा के दिन नहीं गिने गए - दोनों जन्म-नक्षत्र से गिने जाते हैं, जो केवल राशि से नहीं मिलता। नीचे “यह पृष्ठ क्या नहीं गिन सकता” देखें।

यह 52 नमूना-दिनों का सारांश है, हर 7 दिन पर लिया गया - इसमें कोई ऐसा वाक्य नहीं है जो दैनिक नियम पहले न कह चुका हो।

गोचर - चन्द्रमा से गिनकर

ग्रहराशिभावफल
सूर्यकन्या12अशुभ

विपरीत वेध 6वें भाव से - वह भाव रिक्त है

चंद्रवृश्चिक2अशुभ

विपरीत वेध 7वें भाव से - वह भाव रिक्त है

बुधतुला1अशुभ

विपरीत वेध 8वें भाव से - वह भाव रिक्त है

शुक्र(वक्री)तुला1शुभ

वेध 8वें भाव से - वह भाव रिक्त है

मंगलकर्क10अशुभ

इस भाव में इस ग्रह के लिए न वेध सम्भव है, न विपरीत वेध - यह तालिकाओं की वास्तविक रचना है, आँकड़ों की कमी नहीं।

पकने पर दोनों ग्रंथ भिन्न हैं: फलदीपिका 26.25 इसे 2 द्रेष्काण में अपका कहती है, बृहत्संहिता 104.49-50 इसे 1 अर्ध में पका। भेद ही सूचना है।

गुरुकर्क10अशुभ

विपरीत वेध 9वें भाव से - वह भाव रिक्त है

शनि(वक्री)मीन6शुभ

वेध 9वें भाव से - वह भाव रिक्त है

पकने पर दोनों ग्रंथ भिन्न हैं: फलदीपिका 26.25 इसे 2 द्रेष्काण में अपका कहती है, बृहत्संहिता 104.49-50 इसे 2 अर्ध में पका। भेद ही सूचना है।

राहु(वक्री)कुम्भ5अशुभ

इस भाव में इस ग्रह के लिए न वेध सम्भव है, न विपरीत वेध - यह तालिकाओं की वास्तविक रचना है, आँकड़ों की कमी नहीं।

केतु(वक्री)सिंह11शुभ, किन्तु वेध से अवरुद्ध

वेध 5वें भाव से - सक्रिय (राहु)

“अशुभ, विपरीत वेध से कुछ राहत” फिर भी अशुभ ही है। कोई ग्रंथ राहत की मात्रा नहीं बताता, इसलिए यह एक अवस्था है, संख्या नहीं।

“When the Sun passes through the 6th, 3rd and 10th signs from the sign occupied by the Moon at the time of birth of a person, the effects will be benefic; when the Moon passes through the 3rd, 6th, 10th, 7th, and 1st signs from the Moon, the effects will also be benefic; when Jupiter passes through the 7th, 9th, 2nd and 5th signs or when Mars and Saturn pass through the 6th and 3rd signs or when Mercury passes through the 6th, 2nd, 4th, 10th and 8th signs from the Moon, the effects will be benefic. But when Venus passes through the 7th, 6th and 10th signs from the Moon, the effects will be malefic. All the planets produce benefic effects when they pass through the 11th house from the Moon.”
Brihat Samhita, 104.4 (Iyer Part II ch. LVII) - the favourability table, reckoned from the natal Moon (tr. N. Chidambaram Iyer, 1885) · tr. N. Chidambaram Iyer, 1885
चन्द्र बल

गोचर चन्द्रमा आपकी जन्म राशि से द्वितीय भाव में है - चन्द्र बल अनुकूल नहीं है।

यह कोई अलग सिद्धान्त नहीं है - यह उसी गोचर तालिका की चन्द्र-पंक्ति है, और बृहत्संहिता 104.4 में स्वतन्त्र रूप से भी मिलती है।

चन्द्राष्टमनहीं

गोचर चन्द्रमा जन्म राशि से द्वितीय भाव में है, आठवें में नहीं।

यह अश्रेणीबद्ध रूप है। कालप्रकाशिका XXXIV इसे छह नामित भेदों में बाँटती है - उसके लिए जन्म-नक्षत्र चाहिए, जो एक राशि से नहीं मिलता।

  • लागू: यदि जन्म राशि और उससे अष्टम राशि के स्वामी परस्पर मित्र हों, तो चन्द्राष्टम की समस्त अशुभता नष्ट हो जाती है।
  • लागू नहीं: चन्द्राष्टम अशुभ फल नहीं देता जब चन्द्र शुक्ल पक्ष में हों, शुभ राशि में भली प्रकार स्थित हों, और शुभ नवांश में हों।

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यह पढ़त कितनी दूर तक जाती है

“Though a planet might be benefic to a person, he produces benefic effects only according to the nature of the Dasa periods and the rank of the person in life, just in the same way as the quantity of rain falling into a small cup cannot but be small though the rain be excessive.”
Brihat Samhita, 104.46 (Iyer Part II ch. LVII) - the rain-in-a-cup cap on every transit reading (tr. N. Chidambaram Iyer, 1885) · tr. N. Chidambaram Iyer, 1885

कोई ग्रह किसी व्यक्ति के लिए शुभ हो, तब भी वह शुभ फल उतना ही देता है जितना उसकी दशा की प्रकृति और व्यक्ति की स्थिति सहन कर सके - जैसे वर्षा कितनी भी प्रबल हो, छोटे पात्र में उतना ही जल भरता है।

यह पृष्ठ क्या नहीं गिन सकता

एक राशि से गोचर की पूरी तालिका, वेध, विपरीत वेध, चन्द्र बल, चन्द्राष्टम और संक्रान्ति-मास - सब निकल आते हैं। नीचे की परतें नहीं निकलतीं, और हर एक के आगे लिखा है कि उसके लिए क्या चाहिए। किसी को अनुमान से नहीं भरा गया।

  • जन्म-नक्षत्र चाहिएतारा बल - तारा जन्म-नक्षत्र से गिनी जाती है, जन्म-राशि से नहीं। एक राशि तीन जन्म-नक्षत्रों में फैली है और इसलिए तीन निकटवर्ती तारा देती है, अतः कोई एक तारा नहीं बताई जा सकती।
  • जन्म-नक्षत्र चाहिएलत्ता दोष - लत्ता किसी नक्षत्र पर पड़ती है। जन्म-नक्षत्र के बिना गोचर-ग्रह के पास आघात करने को कुछ नहीं।
  • जन्म-नक्षत्र चाहिएचन्द्राष्टम का षड्विध विभाजन - कालप्रकाशिका XXXIV चन्द्राष्टम को छह नामों में बाँटती है, इस आधार पर कि चन्द्र किस तारा में हैं। केवल अष्टम भाव का संकेत राशि से मिल जाता है और वह दिया गया है; विभाजन के लिए जन्म-नक्षत्र चाहिए, जो नहीं है।
  • जन्म-नक्षत्र चाहिएअंग-स्तर - फलदीपिका 26.35-40 जन्म-नक्षत्र से गिने 27 नक्षत्रों को जातक के अंगों पर आरोपित करती है, प्रत्येक गोचर-ग्रह के लिए। यह पूर्णतः जन्म-नक्षत्र पर आधारित है।
  • जन्म-नक्षत्र चाहिएजन्म / अनुजन्म / त्रिजन्म संक्रान्ति नियम - फलदीपिका 26.29 तब लागू होती है जब जन्म-नक्षत्र, उससे दसवाँ या उन्नीसवाँ उस दिन चल रहा हो जो संक्रान्ति, राशि-प्रवेश, ग्रहण या ग्रह-युद्ध का भी दिन हो। इसके तीनों नक्षत्र जन्म-नक्षत्र से गिने जाते हैं।
  • जन्म-कुंडली चाहिएप्रत्येक विषय के भाव, भावेश और कारक अंग - फलदीपिका 15.25 पूछती है कि भाव, भावेश और कारक - तीनों बलवान हैं या नहीं। ये तीनों प्रश्न जन्म-कुण्डली के हैं, और केवल राशि में इनमें से कुछ नहीं होता। भाव और कारक फिर भी दिखाए गए हैं - वे ग्रंथ के हैं और कुण्डली पर निर्भर नहीं।
  • जन्म-कुंडली चाहिएभाव-आधारित गोचर नियम - फलदीपिका 16.32 और 17.1 भावेश की राशि और नवांश को आधार बनाती हैं। कुण्डली के बिना कोई भावेश ही नहीं।
  • जन्म-कुंडली चाहिएलग्न से गिना गौण फल - प्रत्येक भिन्नाष्टकवर्ग की लग्न-पंक्ति चन्द्र की पंक्ति से वास्तव में भिन्न तालिका है, और उसके लिए जन्म-समय चाहिए। इसे चन्द्र के भावों को किसी और बिन्दु से गिनकर बनाने के बजाय रिक्त रखा गया है।
  • जन्म-कुंडली चाहिएगोचर पर अष्टकवर्ग - फलदीपिका 26.41 गोचर को उस राशि में ग्रह के अपने बिन्दुओं के आधार पर पढ़ती है जिसमें वह भ्रमण कर रहा है। बिन्दु-तालिकाएँ सभी नौ ग्रहों और लग्न से बनती हैं, अतः इसके लिए पूरी कुण्डली चाहिए - केवल राशि से कुछ नहीं मिलता।
  • जन्म-समय चाहिएप्रत्येक गोचर पर दशा का प्रभाव - बृहत् संहिता 104.46 गोचर की मात्रा को चल रही दशा पर निर्भर बताती है, और दशा के लिए चन्द्र का सूक्ष्म अंश तथा जन्म-क्षण चाहिए। यह सीमा फिर भी दिखाई गई है - दशा ज्ञात हो या न हो, वह लागू रहती है।
  • जन्म-समय चाहिएवर्षफल - मुन्था, वर्षेश और सहम - ताजिक वर्ष वह क्षण है जब सूर्य अपने जन्म-अंश पर लौटते हैं, और वह चक्र जन्म-स्थान के लिए बनता है। जन्म-समय, स्थान और जन्म-सूर्य के बिना कोई प्रवेश-क्षण नहीं निकलता।
तारा बल - तीन उत्तर, एक नहीं

एक राशि 2.25 नक्षत्रों में फैली है, इसलिए इस राशि में जन्मे लोग तीन निकटवर्ती जन्म-नक्षत्रों में से किसी एक में आते हैं - और हर एक अलग तारा देता है। इनमें से कौन-सा आप पर लागू है, यह आपके जन्म-नक्षत्र पर निर्भर है, जो इस पाठ को नहीं दिया गया। तीनों दिखाए गए हैं; किसी एक को चुना नहीं गया।

  • चित्रा → विपत् (3) · bad
  • स्वाति → संपत् (2) · good
  • विशाखा → जन्म (1) · neutral
जन्म-विवरण देकर ये सब परतें खोलें →